Balaghat Express
March 11, 2018   04 : 36 : 16 AM

आदिवासी कुलदेवी की मूर्ति को अज्ञात तत्वो΄ ने किया खण्डित

Posted By : Raju Pacheswar

वारासिवनी(पद्मेश)। वारासिवनी थानांतर्गत ग्राम पंचायत डोगरिया के बालाघाट मार्ग पर बंजारी मंदिर के पीछे की पहाड़ी पर स्थित आदिवासी कुलदेवी आदिशक्ति दंतेवाडिऩ माता मंदिर में माता दंतेवाडिऩ की मूर्ति स्थापित है जिसे असामाजिक तत्वों के द्वारा ९-१० मार्च की रात्रि में खण्डित कर दिया गया जिससे आदिवासी समाज में आक्रोश व्याप्त है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ९ मार्च को अखिल भारतीय माता दन्तेवाडिऩ समाज समिति जिला चपरासी फुलसिंह टेकाम रात्रि में मंदिर में ताला लगाकर अपने घर चले गया था एवं दुसर

दिन यानि शनिवार को सुबह जब परसराम पन्द्रे मंदिर में पुजा करने पहुंचा तो मंदिर का ताला टुटा हुआ था एवं मंदिर में विराजित माता दंतेवाडिऩ की मूर्ति के चारों हाथ खण्डित पड़े थे, त्रिशुल नीचे गिरा हुआ था। जिसके बाद श्री पन्द्रे ने समाज के स्वजातीय बंधुओं, मंदिर समिति के पदाधिकारी एवं ग्राम सरपंच को उक्त घटना की सूचना दी। जिसके बाद आदिवासी समाज के स्वजातीय बंधु और ग्राम सरपंच मंदिर पहुंचकर वास्तविक स्थिति को देखने के बाद वारासिवनी थाने को सरपंच द्वारा घटना की जानकारी दी गई। आदिवासी कुलदेवी की मूर्ति खण्डित होने की जानकारी लगते ही एसडीओपी लोकेश मार्को, थाना प्रभारी महेन्द्रसिंह ठाकुर मंदिर पहुंचकर माता दंतेवाडिऩ की मुर्ति को खण्डित किये गये स्थल का अवलोकन कर असामाजिक तत्वों पर कार्यवाही किये जाने की बात कही। आदिवासी समाज सहित अन्य समाज के भक्तजन उक्त मंदिर में पहुंचकर पूजा-पाठ करते है, मंदिर की मूर्ति खण्डित होने से आदिवासी समाज सहित अन्य हिन्दु समाज में आक्रोश व्याप्त है एवं सभी ने पुलिस प्रशासन से असामाजिक तत्वों को गिरफ्तार कर सख्त कार्यवाही करने की मांग की है, मांगे पूर्ण नही होने पर उग्र आंदोलन हेतु बाध्य होने की बात कही है। पुलिस ने हरीलाल पन्द्रे की रिपोर्ट पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भादवि की धारा २९५ के तहत मामला पंजीबध्द कर, मामले को जांच में लिया है। असामाजिक तत्वों को जल्द गिरफ्तार कर सख्त कार्यवाही करने की मांग द्वारकाप्रसाद मरकाम, इन्दलसिंह मरकाम, लखन पन्द्रे, सोबतप्रसाद पुसाम, परसराम पन्द्रे, इशु मड़ावी, छोटु वाडिवे, इंदर वरकड़े, फुलसिंह टेकाम, केवतीबार्द तुमडाम, रमोतीबाई मडावे, सुशीलाबाई वरकड़े, धनश्याम वरकड़े, अनिल कुर्वेती, टेकसिंह उइके, रमेश नेवारे, कपुरचंद उइके, राजेन्द्र पटले, उमेश सहारे, दीलिप वरकड़े, आत्माराम तुमड़ाम, सावन पन्द्रे, सुनिल पुसाम, लालसिंह उइके, अनुप उइके, राधेलाल वरकड़े, मानसिंह पन्द्रे, करण मेरावी, प्रहलाद वरकड़े सहित अन्य ने की है। मूर्ति को तोड़कर आदिवासी आस्था को पहुंचाया ठेस आदिवासी समाज के स्वजातीय बंधुओं ने बताया कि यह स्थल राजा रजवाड़ों के समय का है जहां क्रांतिकारी कंगला मांझी पुजा करने आते थे जिसके पश्चात सन् १९७२-७३ में उक्त स्थान पर हीरासिंह देव मांझी द्वारा आदिशाक्ति दंतेवाडिऩ माता मंदिर का निर्माण किया गया जिसके बाद २००६ में अखिल भारतीय दंतेवाडिन माता समिति के तत्वाधान में माता दंतेवाडिऩ की मूर्ति की स्थापना की गई और मंदिर का देख-रेख श्री मांझी अंतर्राष्ट्रीय समाजवाद किसान सैनिक जिला कार्यालय डोंगरिया द्वारा किया जाता है। आगे बताया कि असामाजिक तत्वों के द्वारा आदिशक्ति कुलदेवी दंतेवाडिऩ माता की मूर्ति को खण्डित किया गया है जिससे आदिवासी समाज की धार्मिक भावना आहत हुई है साथ ही यह भी बताया कि इस मंदिर में जो भी भक्तजन सच्ची आस्था के साथ आते है उनकी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है। आस्था का स्थल है मंदिर - परसराम पन्द्रे पद्मेश से चर्चा में श्री मांझी अंतर्राष्ट्रीय समाजवाद आदिवासी किसान सैनिक संस्था जिला सचिव परसराम पन्द्रे ने बताया कि आदिवासी समाज की आदिशक्ति कुलदेवी माता दंतेवाडिऩ की मूर्ति को असामाजिक तत्वों ने तोड़ कर धार्मिक आस्था को आहत पहुंचाया है जिससे सामाजिक बंधुओं में आक्रोश व्याप्त है। श्री पन्द्रे ने बताया कि प्राचीन मंदिर है और सभी समाज के लोग आकर पूजा-पाठ करते है और बालाघाट, सिवनी, मण्डला, बैतुल सहित म.प्र., छत्तीसगढ़ के भक्तजन आस्थाओं के साथ दोनों नवरात्र पर्व में आते है और सच्ची श्रध्दा के साथ माता दंतेवाडिऩ की आराधना करने वालों की मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है, पुलिस प्रशासन से मांग है कि असामाजिक तत्वों को गिरफ्तार कर सख्त कार्यवाही करे। दोषियों पर कार्यवाही नही होने पर करेगें आंदोलन - राजूसिंह उइके पदमेश से चर्चा में राजूसिंह उइके ने बताया कि पुर्वजों से सुना है कि यह राजा रजवाड़े के समय से यह स्थल पुज्यनीय है और दंतेवाडिऩ माता के साथ गढ़ माता है पुरातन समय से और क्रांतिकारी कंगला मांझी पूजा करते थे किन्तु १९७२-७३ में मंदिर का निर्माण किया गया और हरूलाल सर्राटी पुंजारी थे उनके निधन के बाद उनके दामाद आत्माराम तुमडाम पुंजारी है। श्री उइके ने बताया कि आदिवासी व मानव समाज की आस्था को चोट पहुंचाने का कार्य किया गया है जिसकी निन्दा करते है इस घटना से आक्रोश व्याप्त है, दोषियों पर कार्यवाही नही होने पर आंदोलन हेतु बाध्य होगें जिसकी जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी। इनका कहना है डोगरिया के बंजारी मंदिर पहाड़ी पर आदिवासी समाज की कुलदेवी दंतेवाडिऩ की मंदिर है, मंदिर में विराजित मूर्ति को असामाजिक तत्वों ने खण्डित किया है जिससे धार्मिक आस्था आहत हुई है, अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज करवा दी है। लिक्खनलाल बिसेन सरपंच, ग्राम पंचायत डोगरिया दंतेवाडिऩ माता मंदिर की मूर्ति को अज्ञात बदमाशों ने क्षतिग्रस्त कर दिये है और उक्त मूर्ति आदिवासी समाज की कुलदेवी की है और सभी समाज के लोग आकर पूजा पाठ करते है, यह दु:खद घटना है, अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला पंजीबध्द कर, पतासाजी शुरू कर दिये है, जिन्होने मूर्ति को खण्डित किया है उन्हे जल्द गिरफ्तार कर लिया जायेगा। लोकेश मार्को एसडीओपी वारासिवनी

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