Balaghat Express
July 16, 2018   01 : 31 : 19 AM

दुकान, रेस्टोरेंट में काम करने वाली महिलाओं को मिला बैठने का अधिकार

Posted By : Admin

तिरुवनन्तपुरम। केरल के कपड़ा उद्योग में काम करने वाली महिलाओं के पास अब तक बैठने का अधिकार नहीं था। उन्हें घंटों खड़े रहकर काम करना पड़ता था। अपने बैठने का अधिकार पाने के लिए महिलाओं को लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी जिसके बाद जाकर अब उन्हें बैठने का अधिकार मिल गया। इस लंबी लड़ाई में पी. विजी नाम की महिला ने एक संघ बनाया जिसका असंगतता मेखला तोजिलाली यूनियन (एएमटीयू) रखा गया। साल 2010 में महिलाओं के अधिकारों के लिए इस संघ ने सरकार का ध्यान अपनी तरफ खींचा। इन्होंने असंगठिग क्षेत्रों में महिलाओ

के महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए, जिसके बाद उन्हें उनके बैठने का अधिकार मिला। अनीत नाम की एक महिला की कहानी सामने आई है। इसमें बताया गया है कि ओनम के सातवें दिन कपड़े की दुकान पर कस्टर्स की काफी भीड़ थी। अनीता के पैरों में बहुत दर्द हो रहा था लेकिन फिर भी न तो उसे टॉयलेट ब्रेक दिया गया बल्कि उसे बैठने तक के लिए मना किया गया। कस्टमर्स को कपड़े दिखाते हुए जब वह थक गई तो उसने थोड़ी सांस लेने के लिए एक दीवार का सहारा लिया, लेकिन फ्लोर मैनेजर ने अनीता से सुस्ताने के लिए मना। इतना ही नहीं उसकी तनख्वाह से 100 रुपए काट लिए। विदेश में बैठे दुकान के मालिक ने सीसीटीवी में उसे देख लिया था। कोजिकोड में स्थित उस दुकान से नौकरी छोड़ने के बाद अनीथा को कहीं और नौकरी लेनी पड़ी। लेकिन अब अनीता जैसी अन्य महिलाओं को बैठने का अधिकार मिल चुका है। महिलाओं के साथ शौचालय न होना भी एक समस्या थी। पूरे दिन खड़े रहने और शौचालय न जाने के कारण उन्हें बहुत सी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। महिला संघ की अध्यक्षता कर रही विज के मुताबिक महिलाओं की शिकायतें दर्द से भरी थी। अगर ने थोड़ी देर बैठने दिए जाने या शौचालय जाने का बोलती तो मालिक गुस्सा हो जाता था और उन्हें नौकरी से निकाल देने की धमकी देता था। विजी बताती हैं कि उन्होंने कई विरोध प्रदर्शन भी किए जिसके बाद सरकार ने श्रम कानूनों में बदलाव किया। अब महिलाएं ड्यूटी के समय में बैठ सकती हैं। अब किसी भी दुकान, रेस्टोरेंट या अन्य व्यवसायों में महिलाओं को टॉर्चर नहीं सहना पड़ेगा।

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