Balaghat Express
July 16, 2018   01 : 55 : 10 AM

सरगुजा : 'गोदना' आर्ट से आदिवासी बच्चों के पढ़ा रही ये टीचर

Posted By : Admin

अंबिकापुर । नगर के केदारपुर प्रायोगिक प्राथमिक शाला में कबाड़ से जुगाड़ पद्घति से बच्चों को शिक्षा देने के साथ अब सरगुजा के पारंपरिक गोदना आर्ट से एक शिक्षिका ने बच्चों को पढ़ाना शुरू किया है। आदिवासी संस्कृति की पहचान गोदना आर्ट से अंग्रेजी के अक्षरों को ब्लैक बोर्ड एवं कपड़े पर उकेरकर पढ़ाई कराई जा रही है, इससे बच्चों को अक्षर ज्ञान के साथ गोदना आर्ट को भी सीखने का अवसर मिल रहा है। स्कूल की शिक्षिका भावना सिंह काफी दिनों से स्कूल के बच्चों को कबाड़ की चीजों से काम की चीजें बनाने की कला

सिखा रही हैं। स्कूलों में कई सजावट की सामग्रियां एवं जरूरत की सामग्रियों का निर्माण कबाड़ों से करने की कला अब यहां के बच्चे सीख चुके हैं। प्राथमिक स्तर के शासकीय स्कूलों में अब शहरी इलाकों में ऐसे बच्चे ही पढ़ने पहुंचते हैं जो अभाव में हैं। शहर में रहने वाले आर्थिक रुप से थोड़े भी मजबूत आर्थिक स्थिति में कोई परिवार है तो वह अपने बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाता है। शहर के शासकीय स्कूलों में जो बच्चे पढ़ते हैं वे कई सुविधाओं से वंचित रहते हैं। इन बच्चों को यदि अच्छे शिक्षक-शिक्षिका मार्गदर्शन देने के लिए मिल गए तो इनका भविष्य शहर के बड़े-बड़े निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से बेहतर नजर आने लगता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाने का जज्बा और जुनून बीच शहर के प्रायोगिक प्राथमिक शाला केदारपुर की शिक्षिका भावना सिंह ने पाल रखा है। इस शिक्षिका ने पिछले कुछ वर्षों से पुराने कपड़े, कागज, कार्टून, अखबार सहित बोतल व अन्य ऐसी सामग्रियां जो घर में बेकार पड़ी होती हैं उसका इस्तेमाल बच्चों के अध्ययन-अध्यापन में करना शुरू किया। जिन चीजों को कबाड़ माना जाता है और फेंक दिया जाता है वह इस शिक्षिका के लिए बेशकीमती होते हैं। ऐसी सामग्रियों को शिक्षिका भावना सिंह सहेज कर रखती हैं और अपने स्कूल के बच्चों को तरह-तरह की सामग्री बनाकर सिखाने का काम करती हैं। अधिकांश बच्चे कबाड़ से जुगाड़ की सामग्री बनाने में माहिर हो चुके हैं। स्कूलों में तरह-तरह की सामग्री व सजावट की सामग्रियां स्कूल में तैयार कर रखी गई हैं, जो न सिर्फ शिक्षिका ने बनाया है बल्कि स्कूल के बच्चों ने बनाया है जो काफी आकर्षक हैं। इन सबके साथ अब शिक्षिका ने बच्चों को सरगुजा की आदिवासी संस्कृति की पहचान गोदना आर्ट से अंग्रेजी के अक्षर बनाकर पढ़ाना शुरू किया है। अंग्रेजी के 26 अक्षरों को गोदना आर्ट के जरिए ब्लैक बोर्ड और कपड़ों में आकर्षक ढंग से बनाकर बच्चों को अंग्रेजी के अक्षर ज्ञान के साथ गोदना आर्ट की कलाएं सिखा रही हैं। बच्चे काफी रुचि के साथ गोदना आर्ट सीख रहे हैं और अंग्रेजी के 26 अक्षरों को भी जान चुके हैं जो अन्य सरकारी प्राथमिक स्कूलों के लिए फिलहाल संभव नहीं है। यही नहीं कापियों को सजाने भी बच्चे गोदना आर्ट का उपयोग कर रहे हैं। लड़का-लड़की की पहचान भी गोदना आर्ट से स्कूल में शिक्षिका भावना सिंह के द्वारा ब्लैक बोर्ड का इस्तेमाल पढ़ाई में अधिक किया जाता है जिससे बच्चे काफी रुचि लेकर पढ़ते हैं। बच्चों को पढ़ाने के अलग तरीके के कारण स्कूल में अलग माहौल बन गया है और बच्चे हर रोज स्कूल भी पहुंचते हैं। ब्लैक बोर्ड पर गोदना आर्ट के जरिए लड़की, लड़का, मां, पिता का चित्र उकेर कर बच्चों को समझाया जाता है जिससे बच्चे आसानी से समझ लेते हैं। मानव आकृति से ए टू जेड किया तैयार शिक्षिका ने गोदना आर्ट में मानव की आकृति से अंग्रेजी के 26 अक्षरों जिनमें ए से लेकर जेड तक तैयार किया है जो बेहद आकर्षक हैं। बच्चे काफी देर तक इस आर्ट को देखते हैं और अक्षरों को भी आसानी से पहचानने लगे हैं। इसके अलावे गोदना आर्ट से ही अनेकानेक बालिकाओं नृत्य करती आकृतियां भी तैयार की गई हैं जिसे लेकर बच्चे भी यह आकृतियां तैयार करने लगे हैं। मिल चुका है कई अवार्ड शिक्षिका को कबाड़ से जुगाड़ के तहत बच्चों को शिक्षा देने के नए तरीके पर जिला स्तरीय व प्रदेश स्तरीय कई अवार्ड व सम्मान प्राप्त हो चुका है। शिक्षिका भावना सिंह का कहना है कि मैं खुद इन चीजों में रुचि रखती हूं। इस कारण अपनी इस रुचि को स्कूल के बच्चों में बांटती हूं। स्कूल में काफी समय होता है जब बच्चे खेलने-कूदने में निकाल देते हैं किन्तु इस समय को हमेशा कबाड़ से बनने वाली सामग्रियों के निर्माण में व्यतीत कराती हूं। उन्होंने बताया कि गोदना आर्ट से इन दिनों बच्चों को पढ़ाई करा रही हूं जो बच्चों के लिए एकदम नया और काफी आकर्षक है।

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