Balaghat Express
September 18, 2018   12 : 36 : 57 PM

पुलिस मूकबधिर आश्रम की ली तलाशी, दुष्कर्म के आरोपित को भेजा जेल

Posted By : Admin

बैरागढ़ कलां स्थित सांई विकलांग एंव अनाथ सेवा आश्रम में पुलिस ने सोमवार को तलाशी अभियान चलाया। एक घंटे की तलाशी के दौरान आश्रम से पुलिस को कोई भी आपत्तिजनक सामान नहीं मिला है। हालांकि आसपड़ोस के लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं । इधर, तीन ज्यादती के मामलों गिरफ्तार केयरटेकर के 19 वर्षीय बेटे अभिषेक को जेल भेज दिया गया है। जांच में सामने आया है कि छात्राओं ने सामाजिक न्याय विभाग के अफसर से भी शिकायत की थी लेकिन उसे दबा दिया गया।करीब दो साल पहले होशंगाबाद की मालाखेडी में सांई विकलांग आश्रम से

ा सेंटर था। इसके संचालक एमपी अवस्थी है। इस आश्रम के संचालक एमपी अवस्थी पर आरोप है कि वह मूक बधिर छात्राओं से मालिश कराकर दुष्कर्म करता था। होशंगाबाद में छात्राओं ने सामाजिक न्याय विभाग से आरोपित की शिकायत भी की, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ हॉस्टल बंद कर दिया गया। इसके बाद आरोपित ने भोपाल के खजूरी थाना क्षेत्र के बैरागढ़ कलां में सांई विकलांग एंव अनाथ सेवा आश्रम खोल लिया। यहां भी मूक बधिर छात्र-छात्राओं का शारीरिक शोषण किया। इसकी शिकायत भी विभाग तक पहुंची लेकिन विभाग ने शिकायत को दबा दिया था। बता दें कि आश्रम में पहली से आठवीं तक के 58 छात्राएं व 42 छात्र हैं। आश्रम में ही हॉस्टल व स्कूल संचालित किया जाता है। गंदा खेल सभी कर्मचारियों के जाने पर शाम छह बजे के बाद होता था। आश्रम की काली करतूतों पर छह एफआईआर सांई विकलांग आश्रम में चल रहे गंदे खेल में अभी तक छह मामले दर्ज हो चुके हैं। इसमें एक मामला होशंगाबाद पुलिस को भेजा गया है। जबकि पांच एफआइआर खजूरी थाने में दर्ज हो चुकी हैं। इस पूरे मामले की जांच पुलिस के लिए चुनौती बन गई है। दरअसल, इस थाने में पुलिसकर्मियों की कमी है। अगर सभी इसकी जांच में लग गए तो रूटीन काम प्रभावित हो जाएगा। मेडिकल कराने के बाद अभिषेक को कोर्ट में पेश किया पुलिस जांच में सामने आया है कि आश्रम में रहने वाली बच्चियों पर बुरी नजर रखने वाले अभिषेक मिश्रा भी था। उसने आश्रम की तीन बच्चियों के साथ ज्यादती की थी। इसकी शिकायत मिलने पर पुलिस ने उसे रविवार रात को गिरफ्तार किया था। सोमवार सुबह मेडिकल कराने के बाद उसे दोपहर बाद कोर्ट में पेश किया गया। वहां से अभिषेक को जेल भेज दिया गया। बता दें कि अभिषेक के पिता विजय मिश्रा और मां मीता मिश्रा पहले से ही छेड़खानी और मारपीट के मामले में जेल में बंद हैं। जांच से सामाजिक न्याय विभाग पर उठे सवाल पुलिस की जांच में सामने आया कि सामाजिक न्याय विभाग के अफसरों द्वारा आश्रम की मॉनीटरिंग न करना महंगा साबित हुआ। दिव्यांग आश्रम में लोगों को आने जाने में कोई रोक-टोक नहीं थी। आरोपित मीता का पति विजय मिश्रा और उसका बेटा अभिषेक स्थायी रूप से निवास कर बच्चियों के बाथरूम और टायलेट का उपयोग कर रहे थे। शिक्षक राकेश चौधरी को क्यों बुलाया जाता था। पुलिस के एक आला अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस मामले में विभाग के एक अफसर को पूरी जानकारी थी। छात्राओं ने उससे शिकायत भी की थी, लेकिन विभाग के उस अफसर ने शिकायत को दबा दिया था। अब वही अफसर जांच को भी प्रभावित करने के लिए अपने रसूख का उपयोग कर रहा है। इस कारण विभाग भी कार्रवाई करने में कतरा रहा है।

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