Balaghat Express
October 05, 2017   01 : 54 : 20 AM

सपाक्स ने सौ΄पा सा΄सद को ज्ञापन

Posted By : Raju Pacheswar

वारासिवनी पदमेश। प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण को लेकर बने हुए गतिरोध एवं इस संबंध में प्रस्तावित संविधान संशोधन को लेकर सपाक्स के पदाधिकारियों ने मंगलवार को सांसद बोधसिंह भगत से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में उन्होंने सांसद श्री भगत से मॉग की है कि वह इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के परिप्रेक्ष्य में उसका परिपालन केन्द्र व राज्य सरकार से करवाने का प्रयास करे। ज्ञापन में सपाक्स ने ७ बिंदुओं को उठाया है। जिसमें उसने प्रदेश सरकार को कठघरे में रखने का प्रया

किया है। सपाक्स के सदस्य राकेश वर्मा ने पदमेश से चर्चा करते हुये बताया कि उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा ३० अप्रैल १६ को मध्यप्रदेश पदोन्नति नियम २००२ अपास्त कर दिया था। जिसके विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की थी, जहॉ सर्वोच्च न्यायालय ने १२ मई १६ को यथास्थिति का अंतरिम आदेश पारित कर दिया। जिसके कारण पिछले डेढ़ वर्षो से प्रदेश में पदोन्नति की समस्त प्रक्रियाएॅ बाधित हो गई है। जिसके कारण हजारों शासकीय कर्मचारी पदोन्नति का लाभ लिए बिना ही सेवानिवृत्त हो गए है और इनसे रिक्त हुए पदों को भरने के स्थान पर शासन ने म.प्र. पदोन्नति नियम २००२ का लाभ लेकर गलत ढंग से पदोन्नत हुए अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के ही शासकीय सेवकों को प्रभार देकर उच्च न्यायालय के निर्णय की अवहेलना की है। श्री वर्मा ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय व अन्य प्रदेशों के उच्च न्यायालय पदोन्नति में आरक्षण के विभिन्न राज्यों के ऐसे नियम को खारिज कर चुके है। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार एक वर्ग विशेष को खुश करने के लिए निर्णय को प्रभावशील करने से बचने की कोशिश कर रही है और सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई को बार-बार टालने की कोशिश करती है। उन्होंने बताया कि शासन के नियमों से जहॉ एक वर्ग विशेष अनुचित लाभ लेते हुए लघु सेवाकाल में वरिष्ठ पदों पर पहुॅच गया है, वहीं बहुसंख्यक वर्ग सेवाकाल और अनुभव में परिपक्व होते हुए भी कनिष्ठ पदों पर रहकर प्रताडि़त हो रहा है। सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग में पदोन्नति बाधित रहने से इन वर्गो की भर्तियॉ भी बाधित हुई है और इन वर्गो के हजारों नौजवान नौकरियों से वंचित होकर बेरोजगार है। श्री वर्मा ने बताया कि हमने अपने ज्ञापन में सांसद श्री भगत से मॉग की है कि सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे प्रकरण का शीघ्र निराकरण करवाने, उच्च न्यायालय के निर्णय का पालन करवाने,शासकीय सेवा में भर्ती के मूल पद पर हुए चयन की निर्धारित वरिष्ठता के अनुसार समस्त वरिष्ठता सूचियॉ संशोधित कर शासकीय सेवक के संपूर्ण सेवाकाल में उक्त वरिष्ठता को ही मान्य किया जाए, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की बाध्यता की शर्त के अधीन रिक्त पदों पर सामान्य, पिछड़ा व अल्पसंख्यक वर्ग के सेवा में वरिष्ठ अधिकारियों को उनकी मूल वरिष्ठता नियुक्ति पदक्रम अनुसार प्रभार दिए जाए, उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद शासन ने नये पदोन्नति नियम बनाने हेतु गठित समिति में एक पक्षीय प्रतिनिधित्व रखा गया है, उसे ५ सदस्यीय बनाकर उसमें २ सदस्य सामान्य वर्ग, एक-एक सदस्य अन्य पिछड़ा, अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग से बनाया जाए और न्यायालयों के निर्णयों व निर्देशों के अनुरुप ही नियम बनवाये जाए, वहीं शासकीय सेवा में कार्यरत कर्मियों में अनुसूचित जाति का प्रतिशत १८ है, जो निर्धारित से २ प्रतिशत अधिक है, इसीलिए इस वर्ग के बैकलाग की भर्तियॉ पूरी तरह से प्रतिबंधित की जावें और पदोन्नति में आरक्षण पर न्यायालयों द्वारा दिए गए निर्णयों के खिलाफ संविधान संशोधन का प्रयास अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के मंत्री, सांसद व विधायक अन्यायपूर्ण मॉगों के लिए एकजुट होकर कर रहे है,वहीं बहुसंख्यक वर्ग के प्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है, इसीलिए न्यायोचित मॉगों के लिए प्रधानमंत्री के समक्ष तथ्यों व असंतोष को प्रकट करते हुए संविधान संशोधन की किसी भी पहल का पुरजोर विरोध करे। सपाक्स के पदाधिकारियों से ज्ञापन लेने के बाद सांसद श्री भगत ने इस संबंध में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से चर्चा करने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर सपाक्स के डॉ. अरुण नेमा, कीर्तिसिंह ठाकुर, वेंकटेश, प्रकाश सूर्यवंशी, एस डी पटले, राकेश वर्मा, मनोज शांडिल्य, के के पांडे, अशोक शुक्ल, डॉ. नीरज पुरी, शलभसिंह बैस, पी के व्यास, मदनलाल ठाकरे सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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